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Sanskriti University Signs MOU with Shri Aurobindo Society
University will offer Various Programmes in Vedic Sciences and Indian Culture

Sanskriti University Signs MOU with Shri Aurobindo Society

Mathura. Sanskriti University has signed an MOU with Shri Aurobindo Society to offer certificate, diploma and UG & PG degree programmes in Vedic Sciences and Indian Culture. This has paved the way for commencement of Programmes in Vedic Sciences and Indian Culture at Sanskriti University. Shri Aurobindo Foundation for Indian Culture (SAFIC) under the aegis of Shri Aurobindo Society shall work collaboratively with Sanskriti University in the process of curriculum development, academic delivery, research, exchange programs and allied areas to offer certificate, diploma, under graduate, post graduate programmes in Vedic Sciences and Indian Culture. The programmes are likely to be delivered with effect from the Academic session 2019-2020. Sanskriti University and SAFIC under the aegis of Shri Aurobindo Society shall offer all the educational and training programs collaboratively.

Chancellor Sachin Gupta said that Indian culture is known globally for the rich and varied cultural heritage and it would be our sincere endeavor to work on imparting educational and training programs to propagate the rich and varied cultural heritage of India throughout the globe. He said that the modern professionals must be imbibed with the cultural values over and above the delivery of knowledge, skills and competencies to them. People from across the globe have shown keen interests in studying the Indian culture and traditions. The MOU between SU and SAFIC under the aegis of Shri Aurobindo Society will open new vistas of excellence in the domain of education and training of Indian Culture. SU has consistently been working on offering educational and training programs having immense demand and opportunities in India and abroad.

Pro Chancellor Shri Rajesh Gupta said that the university shall offer education and training programs in the domain of Vedic Sciences ranging from one-month Programme to Bachelors / Master Degree Programmes. He also said that the University shall start Diploma in Cultural Studies.

OSD Smt. Meenakshi Sharma said that Shri Aurobindo Foundation is spreading the importance of Indian culture throughout the country and is imparting knowledge, skills and competencies in various educational and training programs.

Executive Director PC Chhabra said that the faculty members imparting educational and training programs on Indian Culture shall also be getting specialized training at Pondicherry. This will prove to be a boon to treasure and restore the rich and varied culture, traditions and cultural values. We will also be inviting Guest Speakers as well as visiting faculty members from Delhi as well as Pin.

Vice Chancellor Dr. Rana Singh said that the academic and training programs shall commence from the academic year 2019-2020. The curriculum of the various proposed programmes has already been finalized for the academic and training programs scheduled to commence from the academic year. The academic programs offered will be of various levels starting from certificate level to the P.G. level.

Mr. Pradeep Narang - Chairman of Sri Aurobindo Society, Sri Vijay Bhai - General Secretary, Shri Vishnu Goel Ji, Dr. J.P. Singh, Dr. Sampadanand Mishra, Sachin Gupta - Chancellor of Sanskriti University, Mrs. Meenakshi Sharma - OSD, Dr. Beloo Mehra and various other eminent personalities from different fields representing the Aurobindo Society were present during the MOU signing Process.


श्री अरबिन्दो सोसाइटी के पदाधिकारियों के साथ वैदिक साइंस की शुरूआत करने को एमओयू के दौरान मौजूद संस्कृति विश्वविद्यालय के कुलाधिपति सचिन गुप्ता।

संस्कृति विश्वविद्यालय में मिलेगा वैदिक विज्ञान शिक्षण
- श्री अरबिन्दो सोसाइटी पांडिचेरी के साथ हुआ एमओयू, डिग्री-डिप्लोमा कोर्स होंगे प्रारम्भ
- संस्कार और संस्कृत आधारित वैज्ञानिक शिक्षण के क्षेत्र में देश का पहला विवि बना संस्कृति
- डिग्री-डिप्लोमा के अलावा पीएचडी तक कर सकेंगे वैदिक विज्ञान में युवा

मथुरा। श्री अरबिन्दो सोसाइटी फॉर इण्डियन कल्चर (सैफिक) पांडिचेरी के साथ संस्कृति विश्वविद्यालय का अनुबंध हुआ है। इससे विवि में स्कूल ऑफ वैदिक साइंस खुलने की राह साफ हो गई है। फाउण्डेशन भारतीय संस्कृति और संस्कृत के क्षेत्रों में शिक्षा और अनुसंधान में विनिमय और सहयोग करेगा। दोनों संस्थान मिलकर डिग्री-डिप्लोमा सहित विभिन्न पाठ्यक्रम तथा प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित कर भारतीय संस्कृति और संस्कारों पर आधारित वैज्ञानिक शिक्षण को आगे बढ़ाएंगे। वर्ष 2019-20 से वैदिक विज्ञान के कोर्स यहां प्ररंभा हो जाएंगे। इसकी तैयारियां शुरू हो गई हैं।

कुलाधिपति सचिन गुप्ता ने बताया कि भारतीय संस्कृति की विश्व में अलग पहचान है। इसकी ओर अनेक विदेशी लोगों के आकर्षण की कई ठोस वजह हैं। देश में इस दिशा में काम बहुत कम संस्थाएं कर रही हैं। इसके चलते ही विवि ने यह अनुबंध किया है और समृद्ध भारतीय परंपरा, संस्कृति एवं संस्कारों को आगे बढ़ाने की दिशा में कार्य करने की पुख्ता शुरूआत की है। विश्व के कई देशों में इसी लिए संस्कृत, भारतीय संस्कृति एवं संस्कारों पर आधिरित शिक्षा को बढ़ावा मिल रहा है। इधर बृज में वृन्दावन हो या फिर गोवर्धन अनेक एनआरआई एवं विदेशी यहां भारतीय संस्कृति में रच बस गए हैं। उन्हें जो सुख करोड़ों की धन सम्पदा अर्जन कर नहीं मिलता वह यहां मिलता है। इसके भी अपने माईने हैं।

उन्होंने कहा कि रोजगार के साथ समाज में प्रबल संस्कार देने वाले युवाओं को तैयार करना वर्तमान की महती आवश्यकता है। इसके लिए वैश्विक मानदंडों पर खरे उतरने लायक युवाओं को तैयार करने की जरूरत है। हर संभावना वाले क्षेत्र को चुनने व युवाओं को शिक्षण व कौशल की दिशा में आगे बढ़ाने का काम विवि कर रहा है। उप कुलाधिपति राजेश गुप्ता ने कहा कि यह कोर्स दो सप्ताह, एक माह, तीन माह के भी हैं। इसके अलावा स्नातक, परास्नातक तथा डिप्लोमा इन कल्चरल स्टर्डीज भी यहां शीघ्र शुरू किया जाना है।

ओएसडी मीनाक्षी शर्मा ने बताया कि श्री अरबिन्दो सोसाइटी देश के विभिन्न सुदूर क्षेत्रों तक पहुंच कर इस पुनीत कार्य को अंजाम दे रही है। इधर विवि भी नई दिशाओं में काम कर को गति देने की दिशा में प्रयत्नशील है। हमारा प्रयास है कि इस क्षेत्र में पीएचडी कोर्स कराकर बच्चों को अन्तर्राष्ट्रीय कंपनियों में जॉब के अलावा भारतीय संस्कृति की पहुंच कायम करेंगे।

उन्होंने कहा कि संस्कृति एवं संस्कारों पर आधारित शिक्षा के अलावा समाज सेवा के क्षेत्र में भी अनेक कार्य कर रहे हैं। गरीब बच्चों के कल्याण से जुडे़ उनके कार्यक्रमों में भी विवि सहभागी बनेगा ताकि सामाजिक दायित्वों के निर्वहन की दिशा में कार्य तेज किया जा सके। उन्होंने कहा कि उक्त कोर्सां को धारतल पर सक्रिय करने के लिए समाज से सीधा संम्बन्ध आवश्यक है। इधर विवि भी नई दिशाओं में काम को गति देने की दिशा में प्रयत्नशील है।

कार्यकारी निदेशक पीसी छाबड़ा ने बताया कि इन महत्वाकांक्षी कोर्सों के लिए प्रशिक्षित शिक्षकों को पांडिचेरी में भी विशेष प्रशिक्षण दिलाया जाएगा। वैदिक साइंस के पाठ्यक्रम भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संजोने एवं आगामी पीढ़ियों के लिए अनूठी सौगात होगा। कुलपति डा. राणा सिंह ने कहा कि अगस्त 2019 से इन कोर्सां को शुरू करने के लिए पाठ्यक्रम आदि फाउण्डेशन के साथ मिलकर तैयार किए जा रहे हैं। कोर्स परास्तनाक एवं पीएचडी स्तर तक रहेंगे। एमओयू के मौके पर फाउण्डेशन की ओर से प्रदीप नारंग चेयरमैन श्री अरबिन्दो सोसाइटी, जनरल सेक्रेटरी, विष्णु गोयल, डा. जेपी सिंह, डा. सम्पदानंद एवं विवि के कुलाधिपति सचिन गुप्ता के अलावा ओएसडी मीनाक्षी शर्मा, मिस बेलू मेहरा तथा वरिष्ठजन मौजूद रहे।

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