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विश्व ऑप्टोमेट्री दिवस पर आंखों की सुरक्षा के उपाय बताये
संस्कृति विश्वविद्यालय में हुई वर्कशाप, अतिथि वक्ताओं ने रखे विचार

मथुरा। विश्व ऑप्टोमेट्री दिवस पर 22 मार्च गुरुवार को संस्कृति विश्वविद्यालय के सेमिनार हाल में हुई वर्कशाप में बतौर मुख्य अतिथि मंटू अकोन विभागाध्यक्ष ऑप्टोमेट्री देश भगत यूनिवर्सिटी लुधियाना, पंजाब ने बीएएमएस, बी ऑप्टोमेट्री, बीपीटी और डीएचपी के छात्र-छात्राओं को आंखों की विभिन्न बीमारियों और उनकी सुरक्षा के उपाय बताये। श्री अकोन ने बताया कि टीवी, लैपटॉप, कम्प्यूटर और स्मार्टफोन के अंधाधुंध इस्तेमाल की वजह से आज बड़ी संख्या में लोगों की नजर कमजोर हो रही है तथा कम उम्र में ही लोगों की आंखों पर चश्मा लग रहा है। आज दुनिया में आंखों की समस्या के मामले में भारत दूसरे स्थान पर है, जोकि चिन्ता की बात है।

श्री अकोन ने कहा कि आज के समय में लोग तरह-तरह की आंखों की बीमारियों से परेशान हैं। आंखों में सूजन, आंखों का लाल होना सामान्य समस्या नहीं है। अगर आंख लाल हो जाती है और उससे पानी गिरने लगता है तो यह वायरल और एलर्जिक कंजंक्टिवाइटिस हो सकता है। वायरल कंजंक्टिवाइटिस अपने आप पांच से सात दिन में ठीक हो जाता है लेकिन इसमें बैक्टीरियल इंफेक्शन न हो, इसलिए ब्रॉड स्पेक्ट्रम एंटीबायॉटिक आई-ड्रॉप का इस्तेमाल करना चाहिए। श्री अकोन ने बताया कि आंख के बीच कॉर्निया पर हुए घाव को कॉर्नियल अल्सर कहा जाता है। यह मरीज के लिए बेहद तकलीफदेह स्थिति होती है। कॉर्नियल अल्सर में आमतौर पर बैक्टीरियल, वायरल और फंगल इंफेक्शन होता है। ग्लूकोमा यानि काला मोतिया से आंख के पर्दे पर पाई जाने वाली नस खराब होने लगती है, इससे नजर लगातार कम होती जाती है।

भक्ति वेदांत आई हास्पिटल बरसाना के सचिन आमटे ने कहा कि आंख के कॉर्निया के पीछे आइरिस होती है। आइरिस में आई सूजन को आयराइटिस कहते हैं। आयराइटिस के दुष्प्रभाव से आंख में मोतियाबिंद या काला मोतिया हो सकता है। स्कलेराइटिस भी आंख की गंभीर बीमारी होती है। इसका अगर समय से सही इलाज न किया जाए तो यह बीमारी आंखों की रोशनी के लिए नुकसानदेह हो सकती है। एपीस्क्लेराइटिस आमतौर पर जवान लोगों में देखने को मिलती है और महिलाओं में ज्यादा पाई जाती है। एंडोफ्थेलमाइटिस में आंख के अंदर इंफेक्शन हो जाता है। आंख के इंटीरियर चौंबर में पस पड़ जाता है, जिसके कारण आंख लाल हो जाती है। इस बीमारी के इलाज में देरी से आंख की रोशनी चले जाने का खतरा रहता है।

वर्कशाप को सम्बोधित करते हुए कुलपति डा. देवेन्द्र पाठक ने कहा कि आंखें मानव शरीर का बेहद अहम हिस्सा हैं क्योंकि इन्हीं के जरिए हम इस खूबसूरत दुनिया को देख पाते हैं, इसलिए आंखों का ख्याल रखना निहायत जरूरी है। अतिथि वक्ताओं के अलावा संस्कृति विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने भी गीत और नाटक के माध्यम से आंखों के महत्व पर प्रकाश डाला। इस वर्कशाप में पिनाकी अदक, डा. अश्वनी कुमार सिंह, रजनी बागनी आदि का सहयोग सराहनीय रहा।

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